The 19yearold Indian was not only proud but also proud of the British

19 साल के इस भारतीय सिपाही को अंग्रेजों ने दिया था सर्वोच्च पुरस्कार

भारतीय सेना अपनी धरती से लेकर विदेश तक हर मोर्चे पर खुद को साबित करती आयी है. सेना में शामिल एक-एक जवान की वीरता की अलग कहानी है. सिर्फ आज़ादी के बाद ही नहीं, उससे पहले भी ब्रिटिश शासन के दौरान भी.

पढ़िए एक ऐसे ही जवान की कहानी, जिसके पराक्रम से प्रभावित होकर अंग्रेज़ शासन से उसे वीरता के अपने सर्वोच्च पुरस्कार से नवाज़ा

बात दूसरे विश्व युद्ध की है, जब भारतीय जवान ब्रिटेन की ओर से जर्मन सेना से युद्ध लड़ रहे थे. उन सैनिकों में 19 साल का युवा सिपाही था, जिसका नाम कमल राम था. 12 मई 1944 का दिन था, बिट्रिश इंडियन आर्मी इटली की गारी नदी के पास जर्मनी से सीधी लड़ाई लड़ रही थी. नदी पार करने के बाद अचानक जर्मनी की ओर से एक साथ चार चौकियों से भारी गोलीबारी हुई.

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indian army
प्रतीकात्मक फोटो

 

इस कारण ब्रिटिश-भारतीय सेना आगे नहीं बढ़ी. तत्कालीन कंपनी कमांडर ने दुश्मन की दायीं चौकी पर हमले के लिए खुद से किसी एक सिपाही को आने के लिए कहा. वीरता का परिचय देते हुए कमल आगे आए.उन्होंने रेंगते हुए तारों के बीच में से निकलकर अकेले ही शत्रु की चौकी पर हमला किया. इस दौरान उन्होंने मशीन गन चला रहे सैनिक को मौत के घाट उतारा. इसके बाद एक दूसरे जर्मन ने पीछे से उनका हथियार छीनने की कोशिश की.

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indian army
प्रतीकात्मक फोटो

कमल राम ने उसे भी तुरंत मौत के घाट उतार दिया. इतना होते देख एक जर्मन अफसर हाथ में पिस्तौल लिए बैरक से बाहर निकाला, जब तक वो हमला कर पाता कमल राम ने उसे भी मार दिया. इसके बाद अपने अदम्य साहस के बूते कमल राम ने एक के बाद एक तीन चौकियों को नष्ट कर दिया.

victoria cross
विक्टोरिया क्रॉस

सिपाही कमल राम की वीरता का सम्मान करते हुए अंग्रेज़ी सरकार ने उन्हें ब्रिटेन के सबसे ऊंचे विक्टोरिया क्रॉस मेडल से नवाज़ा. साल 1944 में उन्हें इस मेडल से खुद जॉर्ज नवाज़ पंचम ने इटली में नवाज़ा. इस वीरता के कारण उन्हें प्रमोट करके सिपाही से सूबेदार के पद दिया गया.

source: news18

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