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एक बार फिर विवादों में JNU, छात्रा ने लगाया टीचर पर गंभीर आरोप

देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में शामिल जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (JNU) एक बार फिर से चर्चा में है। इस बार चर्चा का विषय कश्मीर की आजादी के नारे या कोई अन्य नहीं बल्कि यहां एक टीचर पर संस्थान की एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ और गाली गलौच करने का आरोप लगा है। पीड़ित छात्रा ने यह शिकायत शनिवार को वसंत कुंज थाने में दर्ज कराई है। छात्रा का आरोप है कि टीचर ने 10 अक्टूबर को उसे साबरमती ढाबे के सामने ना सिर्फ छाती से धक्का दिया बल्कि अश्लील भाषा का भी इस्तेमाल किया। हालांकि पुलिस का कहना है कि वह इस मामले की जांच कर रही है, इसी के चलते इसमे एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

पुलिस का कहना है कि वह मामले की जांच कर रही है। देरी से शिकायत के सवाल पर स्टूडेंट का कहना है कि मैंने उस वक्त भी शिकायत की सोची मगर यूनिवर्सिटी की जेंडर सेंसटाइजेशन कमिटी अगेंस्ट सेक्सुअल हैरसमेंट (GSCASH) खत्म की जा चुकी है, इसलिए मैंने नहीं किया। मगर 26 अक्टूबर को जब प्रॉक्टर ऑफिस से मुझे मेल आया, जिसमें जांच में मुझे ही फंसाया जा रहा है, तब दोस्तों की सलाह पर एफआईआर करवाने का फैसला किया।

आइसा की इस स्टूडेंट ने शिकायत में कहा है कि 10 अक्टूबर को टीचर ने साबरमती ढाबे के आगे उनसे बदतमीजी की। उनका कहना है कि उस दिन गर्ल्स हॉस्टल में रेड के खिलाफ दोपहर में आईएचए के आगे जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन प्रदर्शन कर रही थीं। इस बीच ऑफिस से बाहर निकलकर एक शख्स लड़कियों की तस्वीरें खींचने लगा। लड़कियों के ऐतराज पर उसने खुद को टीचर का दोस्त बताया और फोटो डिलीट करने की मांग पर वह भाग गया।

छात्रा का आरोप है कि शाम को करीब 6:30 बजे टीचर एबीवीपी के कुछ लोगों के साथ ढाबे पर बैठे थे। वे लोग मुझे देखकर हंसने लगे और मुझ पर इशारा भी किया। जब यह सब लगातार जारी रहा तो हम कुछ दोस्त नारे लगाने लगे। कई स्टूडेंट्स हमारे साथ हो लिए और कुछ विडियो बनाने लगे। इस पर टीचर ने एक लड़के का मोबाइल छीन लिया। उसी वक्त टीचर ने मुझे गाली देते हुए कहा कि मैं तुम्हें सुबह से देख रहा हू और मुझे छाती से धक्का दिया। इस पर एबीवीपी के लोग मुझ पर हंसने लगे। हमने जेएनयूएसयू प्रेजिडेंट गीता कुमारी को कॉल किया। उन्होंने 100 नंबर पर कॉल किया तो मोबाइल वापस कर दिया गया।

वहीँ एबीवीपी का कहना है कि छात्रा झूठ बोल रही है। एबीवीपी नेता सौरभ शर्मा कहते हैं, उस वक्त मैं वहीं था। उल्टा इन स्टूडेंट्स ने हॉस्टल में रेड डालने का आरोप लगाते हुए टीचर को ढाबे से भगाने की कोशिश की, जिस पर मैंने बीच-बचाव किया। अगर ऐसा ही था, तो शिकायत पहले क्यों नहीं हुई। और GSCASH बंद हुई है तो ICC में शिकायत क्यों नहीं दी?

(भाषा से इनपुट)

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