आतंकी संगठन लश्कर ने कश्मीर में किया कांग्रेस का समर्थन, भड़की बीजेपी


कांग्रेस के दो बड़े नेताओ गुलाम नवी आजाद एवं सैफुद्दीन सोज द्वारा जम्मू-कश्मीर में सेना की कार्रवाई और राज्य की आजादी पर दिए गए बयान के बाद देश की इस सबसे पुरानी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद के सैन्य ऑपरेशन में आतंकवादी से ज्यादा आम लोगों के ज्यादा मारे जाने के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने आजाद के बयान को गैर जिम्मेदाराना, शर्मनाक और सेना का मनोबल तोड़ने वाला बताते हुए कहा कि पूर्व सीएम की इस टिप्पणी से सबसे ज्यादा खुश पाकिस्तान होगा।

बता दें कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने बयान दिया था कि सेना के ऑपरेशन में आतंकी से ज्यादा आम लोग मरते हैं. उन्होंने पुलवामा का उदाहरण भी दिया था. जिसमें उन्होंने कहा था कि पुलवामा में एक आतंकी मरा, लेकिन 13 आम लोग मारे गए थे.

गुलाम नबी ने कहा था कि बीजेपी दावा करती है कि सेना राज्यपाल शासन के तहत कश्मीर में आतंकियों को काबू करने मे कामयाब होगी, लेकिन इस दौरान बेगुनाह लोगों के मारे जाएंगे.

आजाद ने कहा कि कश्मीर पर पाकिस्तान से भी बातचीत होनी चाहिए. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कश्मीर में आतंकियों और आम लोगों के बीच लकीर खींचना मुश्किल होता है. ऐसे गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारियों ने भी माना है.

लश्कर ने किया आजाद के बयान का समर्थन-

उधर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने कांग्रेस नेता गुलाब नबी आजाद के भारतीय सेना पर दिए बयान का समर्थन किया है. एक बयान जारी कर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने कहा कि सेना के मामले पर उसकी राय गुलाम नबी आज़ाद की राय से अलग नहीं. लश्कर के प्रवक्ता अब्दुल्ला गजनवी ने कहा कि भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर के नागरिकों पर जुल्म ढा रही है।

उल्लेखनीय है कि आजाद ने कुछ दिन पहले कहा था कि केंद्र सरकार की दमनकारी नीति का सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता को भुगतना पड़ता है। एक आतंकी को मारने के लिए 13 नागरिकों को मार दिया जाता है।

उन्होंने कहा था, ‘हाल के आंकड़ों पर गौर करें तो सेना की कार्रवाई नागरिकों के खिलाफ ज्यादा और आंतकियों के खिलाफ कम हुई है। घाटी में हालात बिगड़ने का मुख्य कारण यह है कि मोदी सरकार बातचीत करने की अपेक्षा कार्रवाई करने में ज्यादा यकीन रखती है। ऐसा लगता है कि वे हमेशा हथियार इस्तेमाल करना चाहते हैं।’